गणेश अर्थवशीर्ष पाठ

यह गणेष अथर्व षीर्श पाठ का वर्णन अथर्व वेद एवं उपनिशद में किया गया है, यदि जीवन में धन सम्बन्धी, व्यापार सम्बन्धी, कार्यो में बाधा या संकट आते है एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी परेषानी आती है जिस घर में कलेष आदि होती है। इस परेषानी को दूर करने के लिए गणेष अथर्व षीर्श का पाठ करना चाहिए। इससे दीर्घायु, धन की प्राप्ति, इच्छित लक्ष्मी की प्राप्ति, रूके हुए व्यापार में सुधार एवं जीवन सुखमय हो जाता है।

पाठ के लाभ:
गणपति अथर्वशीर्ष का कम से कम एक पाठ नियमित करने से शरीर की आंतरिक शुद्धि होती है। इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। – गणपति अथर्वशीर्ष के पाठ से मानसिक शांति और मानसिक मजबूती मिलती है। इससे दिमाग स्थिर रहते हुए सटीक निर्णय लेने के काबिल बनता है।

भगवान गणेश के नाम से ॐ गं गणपतये नम:
मन्त्र को का जाप करते हुए विधिवत पूजन करें। अथर्वशीर्ष स्त्रोत पाठ से व्यक्ति के सभी दुखों का नाश होता है।

श्री गणेशाय नम:’ ॐ भद्रं कर्णेभि शृणुयाम देवा:। भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्रा:।। स्थिरै रंगै स्तुष्टुवां सहस्तनुभि:। व्यशेम देवहितं यदायु:।। ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा:। स्वस्ति न: पूषा विश्ववेदा:। स्वस्ति न स्तार्क्ष्र्यो अरिष्ट नेमि:।। स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु।। ॐ शांति:। शांति:। शांति:।।

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